गमले में तोरी कैसे उगाएं? बीज से भरपूर फसल तक की पूरी गाइड (2026)
क्या आप भी घर की बालकनी या छत पर ताज़ी और जैविक तोरी उगाना चाहते हैं?
अगर आपके पास खेत नहीं है और केवल एक छत, बालकनी या छोटा सा आंगन है, तब भी आप आसानी से गमले में तोरी उगा सकते हैं। कई लोग सोचते हैं कि तोरी जैसी बेल वाली सब्जी केवल खेत में ही अच्छी होती है, लेकिन सही गमला, उपयुक्त मिट्टी, पर्याप्त धूप और थोड़ी देखभाल से एक ही पौधा कई महीनों तक लगातार तोरी देता रहता है।
इस विस्तृत गाइड में हम बीज चुनने से लेकर पौधे की देखभाल, खाद, सिंचाई, रोग नियंत्रण, कटाई और उत्पादन तक हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा करेंगे ताकि आपको किसी दूसरी वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता न पड़े।
तोरी का परिचय
तोरी (Ridge Gourd / Sponge Gourd) भारत की सबसे लोकप्रिय गर्मियों की बेल वाली सब्जियों में से एक है। यह तेजी से बढ़ती है और उचित देखभाल मिलने पर लगातार कई सप्ताह तक फल देती रहती है।
तोरी का स्वाद हल्का होता है और यह पाचन के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती है। इसमें विटामिन A, C, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।
यदि आप घर में जैविक सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो तोरी सबसे आसान और सफल विकल्पों में से एक है।
गमले में तोरी उगाने के फायदे
1. पूरी तरह जैविक सब्जी
आप बिना किसी रासायनिक दवा के ताजी और सुरक्षित तोरी प्राप्त कर सकते हैं।
2. कम जगह में अधिक उत्पादन
सिर्फ एक बड़ा गमला और मजबूत सहारा (Trellis) पर्याप्त होता है।
3. लगातार कई महीनों तक फल
एक स्वस्थ पौधा लगातार नई बेल और नए फल देता रहता है।
4. कम खर्च
एक बार गमला, मिट्टी और बीज खरीदने के बाद बार-बार खर्च नहीं करना पड़ता।
5. परिवार के लिए ताजी सब्जी
रसोई में जरूरत पड़ते ही ताजी तोरी तोड़कर उपयोग कर सकते हैं।
तोरी लगाने का सही समय
भारत के अधिकांश क्षेत्रों में तोरी वर्ष में दो बार लगाई जा सकती है।
गर्मी की फसल
फरवरी से अप्रैल
सबसे अच्छा समय माना जाता है।
वर्षा की फसल
जून से जुलाई
बरसात में भी अच्छी बढ़वार होती है, लेकिन जल निकासी अच्छी होनी चाहिए।
दक्षिण भारत
गर्म क्षेत्रों में लगभग पूरे वर्ष उगाई जा सकती है।
सही गमला कैसे चुनें?

तोरी की जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं, इसलिए बड़ा गमला चुनना चाहिए।
आदर्श आकार
- 18–24 इंच गहरा
- 18–24 इंच चौड़ा
- 40–60 लीटर क्षमता
कौन-कौन से गमले उपयोग कर सकते हैं?
- ग्रो बैग
- प्लास्टिक गमला
- सीमेंट का गमला
- मिट्टी का गमला
- ड्रम
- बड़ी बाल्टी
Drainage Hole
गमले के नीचे कम से कम 4–6 छेद अवश्य होने चाहिए ताकि पानी जमा न हो।
तोरी के लिए सबसे अच्छी मिट्टी

तोरी अच्छी जल निकासी वाली, हल्की और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी पसंद करती है।
आदर्श मिश्रण
- 40% बगीचे की मिट्टी
- 30% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट
- 20% रेत
- 10% कोकोपीट
अतिरिक्त सामग्री
- नीम खली
- बोन मील (यदि उपलब्ध हो)
- लकड़ी की राख (थोड़ी मात्रा)
- ट्राइकोडर्मा
pH
6.0–7.0 सबसे उपयुक्त माना जाता है।
अच्छा बीज कैसे चुनें?

हमेशा प्रमाणित और ताजा बीज खरीदें।
बीज चुनते समय ध्यान दें—
- अंकुरण क्षमता अधिक हो।
- रोगमुक्त हो।
- नई पैकिंग हो।
- स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्म हो।
यदि पिछले वर्ष की स्वस्थ तोरी से बीज सुरक्षित रखे गए हैं तो उनका भी उपयोग किया जा सकता है।
बीज बोने से पहले तैयारी
बीजों को 8–10 घंटे पानी में भिगोने से अंकुरण तेज होता है।
इसके बाद 20–30 मिनट तक जैविक फफूंदनाशक (जैसे ट्राइकोडर्मा) से उपचार करने पर पौधे स्वस्थ रहते हैं।
Step-by-Step रोपण प्रक्रिया

चरण 1-गमले में तैयार मिट्टी भरें।
चरण 2-ऊपर लगभग 2–3 इंच जगह खाली रखें।
चरण 3-बीज को लगभग 1–1.5 इंच गहराई में बोएं।
चरण 4-एक बड़े गमले में 2–3 बीज बो दें।
चरण 5-अंकुरण के बाद सबसे स्वस्थ पौधा रखें और बाकी पौधों को सावधानी से हटा दें।
चरण 6-हल्की सिंचाई करें।

चरण 7-गमले को धूप वाली जगह रखें।
आमतौर पर 5–10 दिनों में अंकुरण शुरू हो जाता है।
1. सिंचाई (Watering)
तोरी का पौधा न तो बहुत अधिक पानी पसंद करता है और न ही लंबे समय तक सूखी मिट्टी। सही सिंचाई से जड़ें मजबूत बनती हैं, फूल अधिक आते हैं और फल का आकार भी अच्छा रहता है।
कब पानी दें?
- गर्मियों में: प्रतिदिन या आवश्यकता अनुसार।
- बरसात में: केवल जब मिट्टी सूखी लगे।
- सर्दियों में: 2–3 दिन के अंतराल पर।
ध्यान दें: पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी 2–3 सेमी परत को उंगली से जांचें। यदि सूखी लगे तभी सिंचाई करें।
पानी देने का सही तरीका
- सुबह 6–9 बजे या शाम 5–7 बजे पानी दें।
- सीधे जड़ों में पानी दें।
- पत्तियों पर बार-बार पानी डालने से बचें।
- गमले में पानी कभी जमा न होने दें।
अधिक पानी देने के नुकसान
- जड़ सड़ना
- पत्तियां पीली होना
- फूल झड़ना
- फफूंद रोग बढ़ना
- फल कम लगना
2. धूप की आवश्यकता
तोरी सूर्य प्रेमी पौधा है। जितनी अच्छी धूप मिलेगी, उतने अधिक फूल और फल मिलेंगे।
कितनी धूप चाहिए?
कम से कम 6–8 घंटे सीधी धूप।
यदि 8 घंटे या उससे अधिक धूप मिलती है तो उत्पादन और भी बेहतर होता है।
बालकनी में उगाते समय
- दक्षिण या पश्चिम दिशा सबसे बेहतर रहती है।
- यदि केवल 3–4 घंटे धूप मिलती है तो पौधा तो बढ़ेगा, लेकिन फल कम आएंगे।
3. बेल को सहारा (Trellis) देना
तोरी एक बेल वाली सब्जी है। यदि बेल जमीन पर फैलेगी तो फल छोटे होंगे और रोगों का खतरा बढ़ जाएगा।
Trellis क्यों जरूरी है?
- बेल तेजी से बढ़ती है।
- फल सीधे और लंबे बनते हैं।
- हवा का प्रवाह अच्छा रहता है।
- रोग कम लगते हैं।
- कटाई आसान होती है।
सहारा कैसे बनाएं?
आप निम्न सामग्री का उपयोग कर सकते हैं—
- बांस की लकड़ी
- PVC पाइप
- GI वायर
- नायलॉन रस्सी
- मजबूत जाली
जब पौधा 25–30 सेमी का हो जाए, तब बेल को धीरे-धीरे सहारे से बांध दें।
4. खाद प्रबंधन (Fertilizer Schedule)

तोरी तेजी से बढ़ने वाली फसल है, इसलिए इसे नियमित पोषण की आवश्यकता होती है।
रोपाई के समय
मिट्टी में पहले से मिलाएं—
- 2–3 किलो सड़ी गोबर खाद
- 500 ग्राम वर्मी कम्पोस्ट
- 100 ग्राम नीम खली
20 दिन बाद
- 200–300 ग्राम वर्मी कम्पोस्ट
- 1–2 मुट्ठी गोबर खाद
फूल आने पर
हर 15 दिन में दें—
- वर्मी कम्पोस्ट
- केले के छिलके से बनी खाद
- सरसों खली का घोल (पतला करके)
- लकड़ी की राख (थोड़ी मात्रा)
फल बनने के समय
हर 12–15 दिन में
- वर्मी कम्पोस्ट
- जीवामृत
- कम्पोस्ट चाय
- समुद्री शैवाल (यदि उपलब्ध हो)
जैविक तरल खाद
हर 10–15 दिन में इनमें से किसी एक का प्रयोग करें—
- जीवामृत
- कम्पोस्ट टी
- वर्मीवॉश
- पंचगव्य
5. मल्चिंग (Mulching)
यदि गर्मियों में तोरी उगा रहे हैं तो मल्चिंग करना बहुत लाभदायक रहता है।
मल्चिंग के फायदे
- मिट्टी में नमी बनी रहती है।
- खरपतवार कम उगते हैं।
- जड़ें ठंडी रहती हैं।
- पानी की बचत होती है।
- पौधा स्वस्थ रहता है।
किससे मल्चिंग करें?
- सूखी पत्तियां
- सूखी घास
- धान का पुआल
- नारियल का रेशा
मल्च की 2–3 इंच मोटी परत लगाएं, लेकिन तने से थोड़ा खाली स्थान छोड़ दें।
6. अधिक फूल और फल पाने के आसान उपाय
यदि पौधा बड़ा हो गया है लेकिन फल कम आ रहे हैं, तो ये उपाय अपनाएं—
1. पर्याप्त धूप दें
कम धूप सबसे बड़ा कारण है।
2. अधिक नाइट्रोजन से बचें
बहुत अधिक नाइट्रोजन देने से केवल पत्तियां बढ़ती हैं, फल कम आते हैं।
3. पोटाश की मात्रा बढ़ाएं
फूल और फल बनने में मदद मिलती है।
4. नियमित कटाई करें
समय पर तोरी तोड़ने से नए फल जल्दी बनते हैं।
5. कमजोर पत्तियां हटाएं
पुरानी और रोगग्रस्त पत्तियों की छंटाई करें।
7. परागण (Pollination)
तोरी में नर और मादा दोनों प्रकार के फूल आते हैं।
यदि मधुमक्खियां कम आती हैं तो हाथ से भी परागण किया जा सकता है।
हाथ से परागण कैसे करें?
- सुबह 6–8 बजे नर फूल तोड़ें।
- उसकी पंखुड़ियां हटाएं।
- नर फूल के पराग को मादा फूल के बीच वाले भाग पर हल्के से लगाएं।
इससे फल बनने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
8. बेल की छंटाई (Pruning)
बहुत अधिक सूखी या रोगग्रस्त पत्तियों को हटाते रहें।
इससे—
- हवा का संचार बढ़ता है।
- रोग कम लगते हैं।
- पौधे की ऊर्जा फल बनाने में लगती है।
- नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं।
9. पौधे की नियमित निगरानी
सप्ताह में कम से कम 2–3 बार पौधे को ध्यान से देखें।
जांच करें—
- कहीं पत्तियां पीली तो नहीं हो रहीं।
- कीट तो नहीं लगे।
- मिट्टी बहुत सूखी या बहुत गीली तो नहीं।
- बेल सही दिशा में बढ़ रही है या नहीं।
- फूल सामान्य रूप से आ रहे हैं या नहीं।
छोटी समस्या को समय पर पहचानने से बड़ा नुकसान होने से बचा जा सकता है।
1. तोरी में लगने वाले प्रमुख कीट (Pests)

यदि समय रहते कीटों की पहचान कर ली जाए तो बिना रासायनिक दवाओं के भी पौधे को स्वस्थ रखा जा सकता है।
(1) एफिड (Aphids)
पहचान
- पत्तियों और नई टहनियों पर छोटे हरे, काले या भूरे कीड़े।
- पत्तियां मुड़ने लगती हैं।
- पौधे की बढ़वार रुक जाती है।
बचाव
- 5 मिली नीम तेल + 1 लीटर पानी + 2–3 बूंद लिक्विड साबुन मिलाकर 7 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
- लेडीबर्ड बीटल जैसे लाभदायक कीटों को नुकसान न पहुंचाएं।
(2) सफेद मक्खी (Whitefly)
पहचान
- पत्तियों को हिलाने पर सफेद कीड़े उड़ते हैं।
- पत्तियां पीली होने लगती हैं।
- वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
बचाव
- पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं।
- नीम तेल का नियमित छिड़काव करें।
- संक्रमित पत्तियां हटा दें।
(3) लाल मकड़ी (Red Spider Mite)
पहचान
- पत्तियों के नीचे जाला दिखाई देता है।
- पत्तियां पीली और सूखी होने लगती हैं।
बचाव
- पौधे के आसपास हल्की नमी बनाए रखें।
- नीम तेल का छिड़काव करें।
- अधिक गर्म और शुष्क वातावरण से बचाएं।
(4) फल मक्खी (Fruit Fly)
पहचान
- छोटे फलों में छेद।
- फल अंदर से सड़ने लगते हैं।
बचाव
- खराब फल तुरंत तोड़कर नष्ट करें।
- मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप (यदि उपलब्ध हो) का उपयोग करें।
- समय पर कटाई करें।
2. तोरी के प्रमुख रोग (Diseases)
(1) पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew)
पहचान
- पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा दिखाई देता है।
- पत्तियां धीरे-धीरे सूखने लगती हैं।
उपचार
- 1 लीटर पानी में 5 ग्राम बेकिंग सोडा और कुछ बूंदें लिक्विड साबुन मिलाकर छिड़काव करें।
- प्रभावित पत्तियां हटा दें।
- पौधे के बीच पर्याप्त दूरी और हवा का संचार बनाए रखें।
(2) डाउनी मिल्ड्यू
पहचान
- पत्तियों पर पीले धब्बे।
- नीचे की ओर फफूंद जैसी परत।
बचाव
- शाम के समय पत्तियों को गीला न करें।
- सुबह सिंचाई करें।
- संक्रमित पत्तियां तुरंत हटाएं।
(3) जड़ सड़न (Root Rot)
कारण
- अधिक पानी
- खराब जल निकासी
बचाव
- गमले में पर्याप्त ड्रेनेज होल रखें।
- मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।
- आवश्यकता होने पर मिट्टी में ट्राइकोडर्मा मिलाएं।
3. पौधे की नियमित देखभाल
तोरी का पौधा तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
हर सप्ताह जांच करें—
- नई बेल सही दिशा में बढ़ रही है या नहीं।
- सहारा मजबूत है या नहीं।
- सूखी या पीली पत्तियां तो नहीं हैं।
- फूल और छोटे फल स्वस्थ हैं या नहीं।
- कीट या रोग के शुरुआती लक्षण तो नहीं हैं।
4. पौधे की छंटाई (Pruning)
छंटाई से पौधे की ऊर्जा फल उत्पादन में लगती है।
क्या हटाएं?
- सूखी पत्तियां
- रोगग्रस्त पत्तियां
- जमीन को छू रही बेल
- कमजोर शाखाएं
क्या न हटाएं?
- स्वस्थ हरी पत्तियां
- नई बढ़ती हुई बेल
- फूल वाली शाखाएं
5. फूल आने के बाद क्या करें?
जब पौधे पर फूल आने लगें—
- नियमित सिंचाई करें।
- पोटाश युक्त जैविक खाद दें।
- परागण पर ध्यान दें।
- फल बनने तक पौधे को तनाव (Stress) से बचाएं।
6. कटाई का सही समय
तोरी को बहुत बड़ा होने का इंतजार न करें।
कब तोड़ें?
- फल कोमल हो।
- चमकदार हरा रंग हो।
- लंबाई लगभग 20–35 सेमी (किस्म के अनुसार) हो।
बहुत देर से तोड़ने पर फल सख्त और रेशेदार हो सकता है।
कटाई कैसे करें?
- तेज़ और साफ कैंची या प्रूनर का उपयोग करें।
- फल को हल्के डंठल सहित काटें।
- बेल को झटका न दें।
7. एक पौधे से कितना उत्पादन मिलता है?

यदि सही देखभाल की जाए तो—
- प्रति पौधा लगभग 20–40 तोरी मिल सकती हैं।
- अच्छी किस्म और अनुकूल मौसम में यह संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।
- नियमित कटाई से नए फल लगातार आते रहते हैं।
8. आम गलतियाँ (Common Mistakes)
1. छोटा गमला चुनना
जड़ों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती, जिससे पौधा कमजोर रह जाता है।
2. बहुत अधिक पानी देना
यह जड़ सड़न और फफूंद रोग का सबसे बड़ा कारण है।
3. कम धूप
6–8 घंटे से कम धूप मिलने पर फूल और फल कम बनते हैं।
4. सहारा न देना
बेल जमीन पर फैलने से रोग बढ़ते हैं और फल टेढ़े या खराब हो सकते हैं।
5. केवल यूरिया या नाइट्रोजन पर निर्भर रहना
इससे पत्तियां तो बहुत आती हैं, लेकिन फल कम बनते हैं।
6. समय पर कटाई न करना
बड़े और पुराने फल पौधे की ऊर्जा अधिक लेते हैं, जिससे नए फल कम बनते हैं।
7. कीटों को देर से पहचानना
शुरुआती अवस्था में नियंत्रण आसान होता है। नियमित निरीक्षण से नुकसान कम होता है।
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9. Expert Tips
✓ बीज बोने से पहले 8–10 घंटे पानी में भिगोएं।
✓ मिट्टी में हर महीने वर्मी कम्पोस्ट डालें।
✓ हर 15 दिन में नीम तेल का छिड़काव करें (रोकथाम के लिए)।
✓ बेल को ऊपर की ओर प्रशिक्षित (Train) करें।
✓ पीले और सूखे पत्ते तुरंत हटा दें।
✓ सप्ताह में कम से कम दो बार पौधे का निरीक्षण करें।
✓ मधुमक्खियों को आकर्षित करने के लिए आसपास गेंदा या तुलसी जैसे पौधे लगाएं, इससे प्राकृतिक परागण बेहतर हो सकता है।
✓ गमले की मिट्टी को समय-समय पर हल्का ढीला करें ताकि जड़ों तक हवा पहुंच सके।
यदि सही गमला, पोषक मिट्टी, गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त धूप, नियमित सिंचाई और संतुलित जैविक खाद का ध्यान रखा जाए, तो गमले में तोरी उगाना बिल्कुल आसान है। थोड़ी-सी नियमित देखभाल से एक ही पौधा कई सप्ताह तक ताज़ी, स्वादिष्ट और रसायन-मुक्त तोरी देता रहता है। घर की छत या बालकनी में उगाई गई अपनी सब्ज़ी न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है, बल्कि बागवानी का आनंद भी कई गुना बढ़ा देती है।
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1. क्या गमले में तोरी अच्छी तरह उग सकती है?
हाँ। यदि 18–24 इंच का बड़ा गमला, उपजाऊ मिट्टी, 6–8 घंटे धूप और नियमित देखभाल मिले, तो गमले में भी तोरी की बेहतरीन फसल ली जा सकती है।
2. तोरी उगाने के लिए सबसे अच्छा गमला कौन-सा है?
20–24 इंच गहरा और चौड़ा ग्रो बैग, प्लास्टिक गमला, सीमेंट का गमला या बड़ी बाल्टी सबसे अच्छे विकल्प हैं।
3. तोरी लगाने का सही समय क्या है?
उत्तर भारत: फरवरी–अप्रैल और जून–जुलाई
दक्षिण भारत: मौसम के अनुसार अधिकांश समय उगाई जा सकती है।
4. बीज कितने दिन में अंकुरित होते हैं?
अच्छे बीज सामान्यतः 5–10 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।
5. तोरी को कितनी धूप चाहिए?
रोज़ाना कम से कम 6–8 घंटे सीधी धूप आवश्यक है।
6. कितनी बार पानी देना चाहिए?
जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी लगे तभी पानी दें। गर्मियों में रोज़ आवश्यकता हो सकती है, जबकि बरसात में कम सिंचाई करें।
7. क्या तोरी की बेल को सहारा देना जरूरी है?
हाँ। Trellis या मजबूत जाली देने से फल सीधे, साफ और अधिक संख्या में मिलते हैं।
8. कौन-सी खाद सबसे अच्छी रहती है?
वर्मी कम्पोस्ट
अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद
नीम खली
कम्पोस्ट टी
जीवामृत
वर्मीवॉश
ये सभी जैविक विकल्प तोरी के लिए उत्कृष्ट हैं।
9. पौधे में केवल फूल आ रहे हैं, फल क्यों नहीं बन रहे?
इसके कई कारण हो सकते हैं—
कम धूप
परागण की कमी
अत्यधिक नाइट्रोजन
पोषण असंतुलन
अत्यधिक गर्मी
ऐसी स्थिति में हाथ से परागण और पोटाश युक्त जैविक खाद मददगार हो सकती है।
10. तोरी कब तोड़नी चाहिए?
जब फल कोमल, चमकदार और उचित आकार का हो जाए। बहुत बड़ा होने पर स्वाद और गुणवत्ता कम हो जाती है।
11. एक पौधा कितने समय तक फल देता है?
सही देखभाल मिलने पर लगभग 2–3 महीने या उससे अधिक समय तक लगातार फल दे सकता है।
12. एक पौधे से कितनी तोरी मिल सकती है?
उचित देखभाल के साथ एक स्वस्थ पौधा लगभग 20–40 या उससे अधिक फल दे सकता है। यह किस्म, मौसम और देखभाल पर निर्भर करता है।
13. क्या बालकनी में तोरी उगा सकते हैं?
हाँ। यदि पर्याप्त धूप और बेल चढ़ाने की व्यवस्था हो तो बालकनी में भी सफलतापूर्वक तोरी उगाई जा सकती है।
14. क्या केवल जैविक खाद से अच्छी फसल मिल सकती है?
हाँ। सही मात्रा में कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, नीम खली और तरल जैविक खाद का उपयोग करके अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।
15. तोरी में सबसे आम रोग कौन-सा है?
पाउडरी मिल्ड्यू, जड़ सड़न और सफेद मक्खी/एफिड का प्रकोप सबसे सामान्य समस्याओं में शामिल हैं।


